प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेवा-यात्रा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रतीक: कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल
भारतीय संस्कृति में सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोच्च संस्कार है। सेवा की यही भावना व्यक्ति को स्वयं से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, समर्पण, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की इसी भावना को प्रतिबिंबित करते हैं।
7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा का दायित्व संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में जनकल्याण और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की उनकी यात्रा विकास, दृढ़ संकल्प और जनविश्वास से जुड़ी रही है। उनके नेतृत्व में शासन को गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया है।
जनकल्याणकारी योजनाओं से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें हुई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने, आयुष्मान भारत ने पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने और स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के साथ महिलाओं के सम्मान एवं गरिमा को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। वहीं, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से पात्र नागरिकों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है।
जनधन योजना, डिजिटल इंडिया और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ने सरकारी योजनाओं के लाभ को अधिक सरल और पारदर्शी तरीके से नागरिकों तक पहुंचाने में योगदान दिया है। किसान सम्मान निधि, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया और कौशल विकास जैसी पहलों से किसानों, युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार करने का प्रयास किया गया है। इन पहलों का महत्वपूर्ण उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान
विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी ध्यान दिया गया है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का विकास और प्रमुख तीर्थस्थलों पर सुविधाओं का विस्तार भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पहचान देने वाली पहलें हैं।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विस्तार से स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प और आजीविका के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल परंपराओं को सहेजना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की पहचान और उनकी आजीविका को मजबूत करने का माध्यम भी है।
विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ भी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप आगे बढ़ने के प्रयास कर रहा है। प्रदेश में पर्यटन स्थलों के विकास, जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराएं और स्थानीय कला-संस्कृति प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। इनका संरक्षण करते हुए पर्यटन और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देना विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सेवा संकल्प अभियान से जनभागीदारी को मिली नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के अंतर्गत 12 प्रमुख पहलों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को सेवा, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
‘आशीर्वाद का दीया’ ने सेवा, आभार और सकारात्मकता का संदेश दिया, जबकि ‘मेरे सपनों का भारत-चित्र सेवा’ के माध्यम से बच्चों और विद्यार्थियों को विकसित भारत के प्रति अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ और ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ जैसी पहलों ने कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए सेवा की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित किया गया। वहीं, ‘सेवा की कहानी’ ने जनकल्याणकारी योजनाओं से नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को सामने लाने का अवसर प्रदान किया।
‘सेवा संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ और ‘सेवा मेरा योगदान’ जैसी पहलों ने सामाजिक सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।
इसी प्रकार, ‘सेवा सेतु अभियान’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ के माध्यम से नागरिकों को शासकीय सेवाओं से जोड़ने तथा प्रशासन को अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर जोर दिया गया। ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ ने युवाओं की नई सोच और नवाचार को प्रोत्साहित करने का अवसर दिया।
इन सभी गतिविधियों का मूल संदेश यही रहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। जब समाज के विभिन्न वर्ग जनभागीदारी के साथ आगे आते हैं, तो सेवा और विकास के प्रयास अधिक व्यापक बन सकते हैं।
अभियान का समापन, लेकिन सेवा का संकल्प निरंतर
17 अक्टूबर 2026 को सेवा संकल्प अभियान का औपचारिक समापन हो रहा है। बीते एक महीने के दौरान इस अभियान ने सेवा, स्वच्छता, सामाजिक जागरूकता, रचनात्मकता और जनभागीदारी को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया है। हालांकि, किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता केवल उसके आयोजन तक सीमित नहीं होती। उसकी सार्थकता तब बढ़ती है, जब उससे जुड़े विचार और संकल्प लोगों के दैनिक जीवन एवं सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष यह प्रेरणा देते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और जनभागीदारी के माध्यम से बड़े परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक अपने दायित्वों को समझे और समाज तथा राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे।
सेवा को संस्कार बनाना ही अभियान की वास्तविक उपलब्धि
मैं छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने सेवा संकल्प अभियान की भावना को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
आइए, हम सभी संकल्प लें कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता, बेटियों की शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे। इन प्रयासों के माध्यम से हम अपने आसपास सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और समाज को अधिक संवेदनशील एवं समावेशी बनाने में योगदान दे सकते हैं।
सेवा संकल्प अभियान का समापन एक आयोजन का अंत है, सेवा भावना का नहीं। यह जनकल्याण, सुशासन और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में नए संकल्पों की शुरुआत है। सेवा को संस्कार, जनभागीदारी को शक्ति और राष्ट्र निर्माण को साझा लक्ष्य बनाकर ही हम विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।