मंगल ग्रह जाने के लिए धरती के पास लौटे NASA के दो यान! पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति बनेगी अंतरिक्ष की ‘गुलेल’

नई दिल्ली। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक अनोखा प्रयोग कर रही है। मंगल ग्रह की ओर भेजे गए NASA के दो अंतरिक्ष यान एक ऐसे रास्ते से अपनी मंजिल तक पहुंचने की तैयारी में हैं, जिसमें पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति ही उन्हें अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त गति देगी। खास बात यह है कि दोनों यान मंगल की यात्रा पर निकलने से पहले एक बार फिर पृथ्वी के करीब लौट रहे हैं।

NASA के इस मिशन का नाम ESCAPADE (Escape and Plasma Acceleration and Dynamics Explorers) है। इसके तहत दो जुड़वां अंतरिक्ष यान भेजे गए हैं, जिनके नाम BLUE और GOLD हैं।

पहले यान ने पूरी की पृथ्वी की परिक्रमा, दूसरा 9 नवंबर को करेगा फ्लाईबाय

NASA के मुताबिक, पहला अंतरिक्ष यान 7 नवंबर 2026 को पृथ्वी के करीब से गुजरते हुए अपना विशेष इंजन बर्न पूरा कर चुका है। अब दूसरा अंतरिक्ष यान 9 नवंबर को इसी प्रक्रिया को दोहराएगा।

दोनों यान पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरते समय उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करेंगे। इस प्रक्रिया को ग्रेविटी असिस्ट (Gravity Assist) कहा जाता है। इसे आसान भाषा में अंतरिक्ष की गुलेल भी कह सकते हैं, जिसमें किसी ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष यान की दिशा और गति बदली जाती है।

क्या है इस मिशन की सबसे खास बात?

इस मिशन की सबसे अनोखी बात यह है कि दोनों यान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का फायदा उठाने के साथ अपने इंजन भी चालू करेंगे।

NASA के अनुसार, प्रत्येक यान पृथ्वी के सबसे नजदीक पहुंचने के दौरान लगभग 9 मिनट तक अपना इंजन चलाएगा। इसे ट्रांस-मार्स इंजेक्शन बर्न (Trans-Mars Injection Burn) कहा जाता है।

इस प्रक्रिया से यानों की गति में 1,000 मील प्रति घंटे से अधिक की बढ़ोतरी होगी। यानी पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण और इंजन की अतिरिक्त ताकत मिलकर उन्हें मंगल की ओर आगे बढ़ाएंगे।

आखिर सीधे मंगल ग्रह क्यों नहीं भेजे गए यान?

आमतौर पर मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यानों को उस समय लॉन्च किया जाता है, जब पृथ्वी और मंगल अपनी कक्षाओं में अनुकूल स्थिति में होते हैं। ऐसा अवसर लगभग हर 26 महीने में आता है।

लेकिन ESCAPADE मिशन में NASA ने एक नया रास्ता अपनाया। नवंबर 2025 में लॉन्च किए गए दोनों यान सीधे मंगल की ओर जाने के बजाय पृथ्वी-सूर्य के लैग्रेंज पॉइंट-2 (L2) के आसपास एक विशेष कक्षा में गए।

वहां से लंबा चक्कर लगाने के बाद दोनों यान नवंबर 2026 में वापस पृथ्वी के करीब पहुंचे, ताकि पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करके मंगल की यात्रा शुरू कर सकें।

सितंबर 2027 में मंगल ग्रह पहुंचेंगे दोनों यान

NASA की योजना के अनुसार, पहला अंतरिक्ष यान 7 सितंबर 2027 और दूसरा 9 सितंबर 2027 को मंगल ग्रह पर पहुंचेगा।

मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद दोनों यान मिलकर ग्रह के आसपास के वातावरण और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करेंगे। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि सूर्य से आने वाली तेज गति की सौर हवाएं मंगल के वातावरण को किस तरह प्रभावित करती हैं और समय के साथ मंगल ने अपना अधिकांश वायुमंडल कैसे खो दिया।

इस मिशन से वैज्ञानिकों को मंगल के अतीत, उसके वातावरण और भविष्य में वहां मानव मिशन भेजने की संभावनाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

एक दिलचस्प बात: अंतरिक्ष में किसी दूसरे ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करके यान की दिशा और गति बदलना कोई नई तकनीक नहीं है, लेकिन ESCAPADE मिशन में पृथ्वी के पास से गुजरते समय गुरुत्वाकर्षण के साथ इंजन बर्न को जोड़कर मंगल तक पहुंचने का यह पहला ऐसा प्रयास है।

स्रोत: NASA की आधिकारिक रिपोर्ट, 2 नवंबर 2026।

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