छत्तीसगढ़: भरपूर खाद-बीज, आधुनिक तकनीक और मजबूत योजनाओं से समृद्धि की राह पर बढ़ रहा किसान, कृषि क्षेत्र में राज्य ने बनाए नए कीर्तिमान

छत्तीसगढ़: भरपूर खाद-बीज, आधुनिक तकनीक और मजबूत योजनाओं से समृद्धि की राह पर बढ़ रहा किसान, कृषि क्षेत्र में राज्य ने बनाए नए कीर्तिमान

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराने, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। राज्य सरकार का दावा है कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं।

रायपुर में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि विभाग, पशुधन विकास विभाग, उद्यानिकी विभाग, मत्स्य विभाग, मंडी बोर्ड तथा कृषि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

खरीफ सीजन के लिए भरपूर खाद और बीज उपलब्ध

प्रेसवार्ता में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों के भंडारण का लक्ष्य रखा गया था। 30 जुलाई तक 15.16 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 98 प्रतिशत उर्वरकों का भंडारण पूरा कर लिया गया है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है, जबकि 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अभी भी उपलब्ध हैं।

यूरिया का भंडारण लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत किया गया है। वहीं डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग ने कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करते हुए 5,466 निरीक्षण किए हैं। इस दौरान कई मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए गए तथा अवैध उर्वरक जब्त किए गए।

बीजों की उपलब्धता के संबंध में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों की मांग के मुकाबले 4.85 लाख क्विंटल बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।

कृषक उन्नति योजना से किसानों को हजारों करोड़ की सहायता

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को डीबीटी के माध्यम से 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की गई है।

फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान की जगह अन्य फसल लेने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है।

पीएम किसान योजना से लाखों किसानों को लाभ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई। योजना के तहत अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

83 प्रतिशत बोनी पूरी, सामान्य से अधिक बारिश

इस वर्ष खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके मुकाबले अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की स्थिति भी संतोषजनक बताई गई है।

आधुनिक खेती को बढ़ावा

राज्य में कृषि यंत्रीकरण के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल रहा है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभान्वित करते हुए 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।

प्राकृतिक खेती को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।

दलहन और तिलहन उत्पादन पर विशेष फोकस

सरकार प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स जैसी योजनाओं के माध्यम से दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

डिजिटल कृषि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

राज्य में 19,389 ग्रामों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा हो चुका है तथा 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम-आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है।

उद्यानिकी में तेजी से बढ़ा रकबा

प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हो गया है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प और औषधीय फसलों के उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑयल पाम के क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत तथा बांस रोपण में 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

राज्य सरकार बलरामपुर और जशपुर में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में भी प्रगति

राज्य में दूध, अंडा और मांस उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के बीच हुए समझौते के बाद दुग्ध उत्पादकों को अब हर दस दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। नई दुग्ध समितियां, चिलिंग सेंटर और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार भी किया जा रहा है। मोबाइल वेटेरिनरी यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

मत्स्य उत्पादन में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी

राज्य में जलक्षेत्र विकास, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश का मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है और छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।

कृषि विपणन और अधोसंरचना को मिली रफ्तार

प्रदेश की 21 मंडियां ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के तहत 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल की गई है।

राज्य की मंडियों और उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य स्वीकृत और निर्मित किए गए हैं।

रायपुर स्थित शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है, जो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का सफल परीक्षण किया गया।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी तथा टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक तकनीक के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।