आईजीकेवी की बीएससी एग्रीकल्चर परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र प्रसारित होने का मामला, मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
रायपुर, 22 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। वहीं, प्रकरण में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की तकनीकी जांच में साइबर सेल की भी सहायता ली जा रही है, ताकि प्रश्नपत्र के प्रसारण की पूरी कड़ी का पता लगाया जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि प्रश्नपत्र आखिर कहां से और कैसे बाहर आया।
27 कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थी हुए प्रभावित, परीक्षा निरस्त
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त 2026 को आयोजित की गई थी। प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने की शिकायत सामने आई। मामले की गंभीरता और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है। अब यह परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। भर्ती परीक्षा हो या शैक्षणिक परीक्षा, उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रश्नपत्र कहां से आया, किसने किया प्रसारित और किन लोगों की रही भूमिका, जांच करेगी हर कड़ी की पड़ताल
गठित पांच सदस्यीय जांच समिति सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में उपयोग किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान करेगी। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया, किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ और इसकी पहुंच कहां तक रही। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि किसने प्रश्नपत्र को प्रसारित किया और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस और साइबर सेल उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों एवं अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की पूरी कड़ी की जांच आगे बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। मामले की पूरी तह तक जाकर हर तथ्य सामने लाया जाएगा और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
विद्यार्थियों का भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सर्वोपरि, लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए और प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसी किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा, जिससे मेहनत और ईमानदारी के साथ परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा प्रारंभ होने तक की पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं होगा। प्रश्नपत्र प्रसारित होने के इस मामले में जांच अब हर उस कड़ी तक पहुंचेगी, जहां से पेपर बाहर आने और सोशल मीडिया तक पहुंचने का रास्ता बना, और जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।