जशपुर: किसान मधुसुदन भगत के लिए गौपालन बना मजबूत आय का साधन
जशपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नगर पंचायत बगीचा के किसान मधुसुदन भगत पिछले कई वर्षों से समर्पण, मेहनत और आधुनिक तकनीकों के साथ गौपालन को सफल व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
मधुसुदन भगत वर्ष 2005 से बड़े रूप में गौपालन का कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वे कुल 27 गायों का पालन कर रहे हैं। उनकी गायों से प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है, जिसकी खपत बगीचा नगर में ही हो जाती है। इस तरह गौपालन उनके लिए नियमित और मजबूत आय का साधन बन गया है।
जर्सी और लोकल मिक्स ब्रीड की गायों का पालन
किसान मधुसुदन भगत ने बताया कि उनके पास जर्सी नस्ल की गायों के साथ कुछ लोकल मिक्स ब्रीड की गायें भी हैं। उनकी गायों में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध देने की क्षमता है। पशुओं की बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य के लिए वे बगीचा स्थित पशुचिकित्सालय से नियमित इलाज और टीकाकरण करवाते हैं।
पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान
मधुसुदन भगत पशुओं के खाने के लिए मक्के के चूरे का उपयोग करते हैं। मक्के के चूरे को खौलते पानी में डालकर पकाया जाता है, जिसे गायें बहुत चाव से खाती हैं। उनके अनुसार इस तरह तैयार किया गया आहार पशुओं के लिए उपयोगी है और इससे दूध के उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है।
गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, खेती में भी लाभ
मधुसुदन भगत गौपालन के साथ पशुओं के गोबर का भी बेहतर उपयोग कर रहे हैं। दिन में दो बार गोबर को एकत्रित किया जाता है और उसे वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा पशुओं के गोबर का उपयोग अपने खेतों में खाद के रूप में भी किया जाता है। इससे गौपालन और खेती दोनों को एक-दूसरे से जोड़कर अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो रहा है।
मेहनत और सही जानकारी से पशुपालन बना आय का जरिया
मधुसुदन भगत की यह पहल बताती है कि सही जानकारी, मेहनत और विभागीय सहयोग के माध्यम से पशुपालन भी किसानों के लिए मजबूत और स्थायी आय का माध्यम बन सकता है। वर्षों से गौपालन को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाकर उन्होंने यह साबित किया है कि आधुनिक तरीके अपनाकर किसान पशुधन के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।