रायपुर : करेले की उन्नत खेती ने बदली किसान नारायण प्रसाद वर्मा की तकदीर, प्रति एकड़ 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
महासमुंद। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने वाले किसान अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम टेंगराही निवासी किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने करेले की व्यावसायिक खेती के माध्यम से सफलता की नई मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उन्होंने अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
पहले करते थे पारंपरिक धान की खेती
1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि के मालिक नारायण प्रसाद वर्मा पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आय प्राप्त होती थी। अधिक आय अर्जित करने के उद्देश्य से उन्होंने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया और करेले की व्यावसायिक खेती शुरू की। बीते कई वर्षों से करेले की खेती कर वे बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला अनुदान
वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया। शासन की ओर से उन्हें एक हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए 24 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इसके अलावा 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम स्थापना के लिए 5 हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की गई।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ी उत्पादन क्षमता
नारायण प्रसाद वर्मा ने खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाया। मचान विधि से की गई खेती में खेत की नमी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग शीट का उपयोग किया गया, वहीं पानी की बचत के लिए टपक सिंचाई प्रणाली अपनाई गई।
इन आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
प्रति एकड़ 12 टन उत्पादन, 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
किसान नारायण प्रसाद वर्मा के अनुसार, पारंपरिक खेती की तुलना में करेले की उन्नत खेती से उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिला है। उचित तकनीकी प्रबंधन और नियमित देखरेख के कारण प्रति एकड़ लगभग 12 टन करेले का उत्पादन प्राप्त हुआ।
बाजार में फसल का उचित मूल्य मिलने के बाद खेती की सभी लागत और अन्य खर्चों को निकालकर उन्हें प्रति एकड़ करीब 1 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। करेले की व्यावसायिक खेती से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि कृषि के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
नारायण प्रसाद वर्मा की सफलता अब महासमुंद जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन रही है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।