रायपुर : छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मजबूत की अपनी भूमिका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेश बढ़ाने पर दिया जोर
रायपुर। खान मंत्रालय द्वारा रायपुर में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला पर रोड शो आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कोयला एवं खान मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, सीएमडीसी अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों और देश के खनन एवं औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अधिक निवेश, खनिज संसाधनों के त्वरित विकास और केंद्र-राज्य के बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की खनिज क्षमता का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों और उद्योग जगत को राज्य सरकार की ओर से निवेश को सुगम बनाने तथा सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
नीलामी की 8वीं श्रृंखला में छत्तीसगढ़ के पांच खनिज ब्लॉक
खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने बताया कि नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेज परिचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हुआ है। अब तक प्रस्तुत 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।
नीलामी की 8वीं श्रृंखला में नौ राज्यों में कुल 20 ब्लॉक शामिल हैं। इनमें 17 समग्र लाइसेंस और तीन खनन पट्टा ब्लॉक हैं। इन ब्लॉकों में ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इनमें पांच खनिज ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।
उद्योगों से बढ़ी भागीदारी का आह्वान
कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को भारत के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इन संसाधनों के अन्वेषण और विकास में तेजी लाने तथा उद्योग एवं निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना देश की खनिज सुरक्षा को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार का उल्लेख करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, सतत अधोसंरचना मजबूत हो सकती है और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
खनन के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर जोर
खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप कदम ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों को तेजी से परिचालन में लाने के लिए केंद्र, राज्य और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की खनिज क्षमता का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी की दिशा में राज्य की पहलों की जानकारी दी। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किया।
बोलीदाताओं को दी गई नीलामी प्रक्रिया की जानकारी
रोड शो के तकनीकी सत्र में एनएमईडीटी योजना के तहत समग्र लाइसेंस धारकों को अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति की जानकारी दी गई। इसके बाद संभावित बोलीदाताओं को 8वीं श्रृंखला में नीलामी के लिए रखे गए खनिज ब्लॉकों, उनकी संभावनाओं, निविदा दस्तावेज, खनिज नीलामी प्रक्रिया और ई-नीलामी व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान संभावित बोलीदाताओं के साथ संवाद भी हुआ और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े सवालों एवं शंकाओं का समाधान किया गया।
ब्लॉकों के शीघ्र संचालन की हुई समीक्षा
रोड शो के बाद खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों और पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र परिचालन, प्रमुख चुनौतियों और उनके समयबद्ध समाधान पर चर्चा की गई।
बैठक में केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों ने ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा की तथा परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन दिया। यह पहल देश में घरेलू खनिज उत्पादन बढ़ाने, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और खनिज-सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।