सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई " पर केन्द्रित उद्देश्य के साथ मनाया गया अंतराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम
उच्च न्यायालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर श्री सत्येन्द्र कुमार साहू के उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में आज 08 मार्च 2026 को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायालय के सभाकक्ष में "सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई" एवं "नारी शक्ति - विकसित भारत की नींव " शीर्षक के साथ महिला के नेतृत्व वाले विकास, शिक्षा, समानता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “अधिकार और न्याय के साथ-साथ हर महिला और बालिका के सशक्तिकरण के लिए वास्तविक कार्रवाई " वर्ष 2026 के थीम को सार्थक करते हुये मुख्य बिंदु सशक्त नारी सशक्त भारत, समानता और न्याय, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण, स्वस्थ महिला, समृद्ध राष्ट्र, सामूहिक कार्रवाई (गिव टू गेन) अभियान के अंतर्गत उदारता एवं सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
प्रधान जिला न्यायाधीश श्री सत्येन्द्र कुमार साहू ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं अपितु यह एक समावेशी और न्यायसंगत समाज बनाने के लिए कार्रवाई करने का एक आव्हान है। शिक्षित एवं सशक्त महिलाएं किसी भी प्रगतिशील राष्ट्र की मजबूत नींव है। जब महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सहभागिता प्रदर्शित करती है तथा साहस के साथ नेतृत्व करती है, तो यह समाज को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाती है। हमें ऐसे समाज निर्माण की आवश्यकता है, जिसमें महिला को समान अवसर, सम्मान, सुरक्षा एवं स्वतंत्रता मिले। यह दिवस लैंगिक असमानता, कार्यस्थल पर भेदभाव, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शिक्षा एवं अवसरों तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालता है। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों, शक्ति और उनके योगदान का सम्मानित करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। कहा जाता है कि एक पुरूष मकान बना सकता है, पर उस मकान को संस्कारों और खुशियों से सजाकर 'घर' में महिला ही बदल पाती है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) जशपुर श्री जनार्दन खरे द्वारा अपने सम्बोधन में कहा गया कि पुरुष पर्वत के समान स्थिर, कठोर एवं संरक्षक है, जबकि महिला नदी के समान गतिशील, सहनशील और जीवनदायिनी है। जिस प्रकार नदियां गतिशील एवं प्रवाहशील होकर अपना मार्ग का स्वयं निर्माण कर अंत में समुद्र में विलय हो जाती है, उसी प्रकार स्त्रियां समर्पण, सहनशीलता, संस्कृति और पहचान का हिस्सा बनकर मकान को घर में परिवर्तित करके परिवार में विलीन हो जाती है। उक्त कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायालय जशपुर में कार्यरत महिला अधिकारी एवं कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। उक्त कार्यक्रम में श्री जनार्दन खरे, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) जशपुर, श्रीमती सरोजनी जनार्दन खरे, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जशपुर के अतिरिक्त न्यायाधीश जशपुर श्रीमती सुमन सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जशपुर, कु.श्वेता बघेल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर, श्री क्रांति कुमार सिंह, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी जशपुर, कु० अंकिता यदु, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी बगीचा, कु० श्वेता अवस्थी, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पत्थलगांव, श्री विजय कुमार कौशिक, प्रशासनिक अधिकारी, जिला न्यायालय जशपुर, सुश्री सगीरा बानो, अधिवक्ता जशपुर एवं जिला न्यायालय जशपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर के कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।