जशपुर: ग्राम पंचायत कामारीमा में 15वें वित्त आयोग व प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में कथित अनियमितताओं की जांच आज

जशपुर: ग्राम पंचायत कामारीमा में 15वें वित्त आयोग व प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में कथित अनियमितताओं की जांच आज

जशपुर, 02 मार्च 2026। जनपद पंचायत बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत कामारीमा इन दिनों गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत विस्तृत शिकायत के बाद आज प्रशासनिक जांच टीम गांव पहुंचकर दस्तावेजों और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करेगी। आरोप वर्ष 2021 से 2025 के बीच 15वें वित्त आयोग, पंचायत मद और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में कथित गड़बड़ी से जुड़े हैं, जिनमें लाखों रुपये के भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत पत्र में वर्ष 2024-25 के दौरान पीडीएस भवन की साफ-सफाई, मरम्मत और पेंट कार्य के नाम पर अलग-अलग तिथियों में ₹1,04,500, ₹1,76,000, ₹17,000, ₹1,05,000, ₹1,79,500 और ₹15,500 की राशि आहरित दर्शाई गई है। इसके अलावा 23/12/2024 को सीसी कार्य/मरम्मत मद में ₹2,65,000 और ₹1,48,520 तथा कामारीमा में सीसी मरम्मत के नाम पर ₹36,480 का भुगतान दर्ज है। 02/06/2024 को हैंडपंप मरम्मत हेतु ₹1,22,400 और 26/12/2024 को नल फिटिंग सामग्री के लिए ₹1,10,000 की निकासी दिखाई गई है।

इन सभी मदों को मिलाकर लगभग ₹13,79,900 की राशि खर्च दर्शाई गई है। वहीं 30/11/2023 को मतदान केंद्रों में पेयजल व्यवस्था के नाम पर ₹81,000, ₹58,200 और पुनः ₹81,000 यानी कुल ₹2,20,200 का भुगतान दर्ज है। सीसी रोड निर्माण एवं सामग्री भुगतान के नाम पर 20/01/2024 को ₹1,45,000 तथा 24/01/2024 को ₹1,42,275 की राशि निकाली गई है। शिकायत में एक मद में ₹3,00,000 के भुगतान पर भी फर्जी बिल लगाकर राशि आहरण का आरोप लगाया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत में उल्लेख है कि पंचायत में कुल 1181 आवास स्वीकृत हैं, जिनमें लगभग 25 प्रतिशत आवास अपूर्ण होने के बावजूद पूर्ण दर्शाकर भुगतान लेने की बात कही गई है। कुछ हितग्राहियों से मजदूरी मद में ₹25,000 तक कटौती तथा ₹10,000 से ₹20,000 तक अतिरिक्त वसूली के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस मामले में 11/08/2025 और 29/09/2025 को उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया था, परंतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब आज पहुंच रही जांच टीम बिल-वाउचर, मस्टर रोल, भुगतान रजिस्टर, तकनीकी स्वीकृति और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र की जांच के साथ-साथ स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी।

पूरे गांव की नजर इस जांच पर टिकी है कि कागजों में दर्शाए गए लाखों रुपये के कार्य जमीनी स्तर पर कितने सही साबित होते हैं।