“जशपुर के झपरा स्कूल में बच्चे भूखे, शिक्षक गायब , स्कूल भी गंदा! साफ सफाई बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान नहीं, और शिक्षक ने कहा ‘हमारे स्कूल को छोड़ दीजिए’ शिक्षा विभाग की लापरवाही बच्चों का भविष्य खा रहा...

“जशपुर के झपरा स्कूल में बच्चे भूखे, शिक्षक गायब , स्कूल भी गंदा! साफ सफाई बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान नहीं, और शिक्षक ने कहा ‘हमारे स्कूल को छोड़ दीजिए’ शिक्षा विभाग की लापरवाही बच्चों का भविष्य खा रहा...

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला झपरा में स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। पिछले कई दिनों से बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं मिल रहा है, मिलने वाले बिस्किट भी गरीब बच्चों तक नहीं पहुँच रहे हैं। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है। और ऐसे लापरवाह शिक्षकों के कारण शिक्षा विभाग बदनामी का दंश झेल रहा है ।  स्थानीय बच्चों ने बताया “हमारे स्कूल में शिक्षक नहीं आते। अगर कभी आते भी हैं, तो पढ़ाते नहीं। पूरा दिन मोबाइल फोन में बात करते हैं या वीडियो देखते रहते हैं। हम कुछ नहीं सीख पा रहे हैं।”

ग्रामीणों की शिकायत पर जब मीडिया की टीम शासकीय प्राथमिक शाला झपरा पहुंची। वहां 11 बच्चे मौजूद थे जिनमें से कुछ बच्चे खेलते तथा कुछ स्वयं पढ़ते नजर आए। शिक्षकों के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया — “स्कूल में पिछले कई दिनों से चावल नहीं है, जिसे लेने एक शिक्षक गए हैं।” और तो और सबसे शर्मनाक बात स्कूल के दीवारों पर पान गुटका जैसा थूंका नजर आया , साफ-सफाई बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा । 

जब मीडिया ने शिक्षक/समन्वयक रोशन से बात की, तो उन्होंने कहा:“हमारे स्कूल को छोड़ दीजिए। मैं खुद जान रहा हूं। मेरे स्कूल की स्थिति क्या है।” वहां पर उपस्थित बच्चों ने बताया कि स्कूल में खाना नहीं बनता है चावल ही नहीं है ऐसे में हम सभी अपने घर खाना खाने जाते हैं ।

 “ यहाँ सवाल ये नहीं है कि बच्चे भूखे हैं — सवाल ये है कि:

 जब बच्चे स्कूल में खाना नहीं खाते, तो उनका बौद्धिक विकास कैसे होगा? खाना , ऊर्जा ,ध्यान, सीखना , जब पेट खाली हो, तो दिमाग नहीं चलता , जब बच्चे स्कूल में खाना खाते हैं — तभी वो ध्यान से पढ़ते हैं, तभी वो सीखते हैं, तभी उनका भविष्य बनता है।

विद्यालय में किसी प्रकार की बच्चों के ऊपर घटना दुर्घटना क्षति हो तो जिम्मेदारी किसकी? बिना शिक्षक के, बच्चे अकेले ही विद्यालय में आकर खेलते और कुछ पढ़ते रहते हैं। उस दरमियान अगर कोई बच्चा गिर जाए, चोट लगे, कोई दुर्घटना हो जाए — तो जिम्मेदारी किसकी होगी ? 

 शिक्षा विभाग की लापरवाही:

यह मामला सिर्फ झपरा स्कूल तक सीमित नहीं है — यह लगभग सन्ना तहसील क्षेत्र के कई ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविकता है। शिक्षा और भोजन का अधिकार सिर्फ कागज पर नहीं, बच्चों के सामने होना चाहिए।

शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण: स्कूलों का समय पर निरीक्षण नहीं होता , शिक्षकों की उपस्थिति नहीं चेक की जाती, मध्याह्न भोजन की व्यवस्था नहीं देखी जाती , बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता , ग्रामीण इलाकों में ऐसी स्थिति के कारण गांव के लोग महंगे और निजी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को मजबूर हो गए हैं। जो गरीब बच्चे निजी स्कूल में नहीं जा सकते — वो स्कूल में भी नहीं पढ़ पा रहे , यह शिक्षा व्यवस्था की असफलता है  नहीं, ये एक अपराध है।

स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की मांग: जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर से तत्काल जांच की मांग , शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने , मध्याह्न भोजन और बिस्किट वितरण में सुधार करने बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की गई है इसके अलावा स्कूल की साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल ठीक किया जाए , शिक्षक रोशन से स्पष्टीकरण मांगा जाए क्यों उन्होंने मीडिया को स्कूल से दूर रहने को कहा? , शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए — जो स्कूलों का निरीक्षण नहीं करते हैं । 

 अब देखना होगा कि मामले को शिक्षा विभाग कितना गंभीरता से लेता है, और क्या कार्यवाही करती है ।