आस्था पर चोट या विकास की दलील? सन्ना में शराब दुकान को लेकर दो राय,सन्ना में शराब दुकान पर संग्राम, एक ओर राजस्व तो दूसरी ओर धार्मिक आस्था

आस्था पर चोट या विकास की दलील? सन्ना में शराब दुकान को लेकर दो राय,सन्ना में शराब दुकान पर संग्राम, एक ओर राजस्व तो दूसरी ओर धार्मिक आस्था

जशपुर जिले के सन्ना में शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान के उद्घाटन के बाद क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। दुकान खुलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर रसपान का आनंद लेते नजर आ रहे हैं, लेकिन इसी के साथ धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं।

दरअसल, शराब दुकान के ठीक बगल में भगवान श्रीराम की मूर्ति स्थापित है, जहां खूंटा टांगर की महिला संगठन नियमित रूप से पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती हैं। बताया जा रहा है कि शराब दुकान खुलने से कुछ दिन पहले महिलाओं ने इसके विरोध में भगवान श्रीराम की मूर्ति की स्थापना उसी स्थान पर की थी, लेकिन मूर्ति स्थापना के कुछ ही दिनों बाद प्रशासन द्वारा उसी स्थान के पास शराब दुकान का उद्घाटन कर दिया गया।

इस घटनाक्रम से क्षेत्रवासियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों का कहना है कि शराब दुकान के पास भगवान श्रीराम की मूर्ति होना सीधे-सीधे आस्था का अपमान है। ग्रामीणों की मांग है कि या तो वहां शराब दुकान का उद्घाटन नहीं किया जाना चाहिए था, या फिर अब जब दुकान खुल चुकी है तो श्रीराम की मूर्ति को सम्मानपूर्वक किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए।

इधर इस पूरे मामले पर सरपंच अरविंद कुजूर का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि महुआ से बनने वाली कच्ची शराब, अंग्रेजी शराब के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक है। सरपंच के अनुसार कच्ची शराब में बिना किसी मापदंड के केमिकल और दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका सेवन करने वालों की सेहत पर गंभीर और कई बार जानलेवा असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय शराब दुकानों में बिकने वाली अंग्रेजी शराब तय मानकों के अनुसार तैयार की जाती है, जिसमें एल्कोहल की मात्रा सीमित और नियंत्रित होती है।

सरपंच अरविंद कुजूर ने यह भी तर्क दिया कि शासकीय शराब दुकान खुलने से पंचायत और शासन को राजस्व की प्राप्ति होगी, जिससे सड़क, बिजली, पानी और अन्य विकास कार्यों को गति मिलेगी।

हालांकि, अवैध कच्ची शराब बनाने से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि शराब दुकान खुलने से गांव का माहौल बिगड़ेगा और घरेलू हिंसा, झगड़े तथा पारिवारिक समस्याएं बढ़ेंगी। इस मुद्दे को लेकर गांव में दो स्पष्ट मत उभरकर सामने आ गए हैं—एक तरफ राजस्व और विकास की बात, तो दूसरी तरफ सामाजिक और धार्मिक मूल्यों की चिंता।

अब यह मामला केवल शराब दुकान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भगवान श्रीराम की आस्था, महिला संगठनों के विरोध और प्रशासनिक निर्णयों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती बन गया है।