जशपुर: सन्ना में नशे का दोहरा सच: महुआ शराब से मौतों का सिलसिला, फिर भी अंग्रेजी शराब के खिलाफ सड़क पर विरोध

जशपुर: सन्ना में नशे का दोहरा सच: महुआ शराब से मौतों का सिलसिला, फिर भी अंग्रेजी शराब के खिलाफ सड़क पर विरोध

जशपुर। सन्ना क्षेत्र में नशे को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। जहां बीते कुछ वर्षों में महुआ शराब के सेवन से एक ही बस्ती के दर्जन से अधिक लोगों की मौत होने की बात सामने आई है और कई लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी शराब दुकान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। यह स्थिति प्रशासन और समाज—दोनों के लिए गहन विचार का विषय बन गई है।

लगभग 10 हजार की आबादी वाले सन्ना में कुल 20 वार्ड हैं। लंबे समय से यहां के कई मोहल्लों में महुआ शराब का निर्माण और विक्रय लोगों की आजीविका का साधन रहा है। किंतु बीते कुछ वर्षों में इसमें अवैध रूप से रसायनों की मिलावट किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे महुआ शराब अब पारंपरिक पेय न रहकर जहरीले रूप में तब्दील होती जा रही है।

जहरीली महुआ शराब से जनहानि

स्थानीय जानकारों के अनुसार, मुनाफे के उद्देश्य से महुआ शराब में खतरनाक रसायनों की मिलावट की जा रही है। इसका सबसे गंभीर प्रभाव वार्ड क्रमांक 7 में देखा गया है, जहां कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है। पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान यहां लगातार मौतों की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि कई लोग आज भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

अंग्रेजी शराब दुकान खुलने के बाद बदला परिदृश्य

सन्ना के सरपंच अरविंद कुजूर ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से अंग्रेजी शराब दुकान खोलने की मांग की जा रही थी। दुकान खुलने के बाद नशे के स्वरूप में बदलाव देखने को मिला है। बड़ी संख्या में लोग महुआ शराब छोड़कर अंग्रेजी शराब की ओर रुख कर रहे हैं। सरपंच के अनुसार, शराब दुकान से प्रतिदिन लाखों रुपये की वैध बिक्री हो रही है, जिससे महुआ शराब की बिक्री में उल्लेखनीय कमी आई है।

विरोध के स्वरूप पर उठे सवाल

इसी बीच अंग्रेजी शराब दुकान के सामने कुछ लोगों द्वारा भगवान रामलला की मूर्ति रखकर विरोध प्रदर्शन किया गया। यह विरोध उस समय प्रश्नों के घेरे में आ गया, जब महुआ शराब से हो रही मौतों पर अपेक्षित सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यह विरोध जनस्वास्थ्य के सरोकार से जुड़ा है या फिर आर्थिक हितों के प्रभावित होने का परिणाम।

अबकारी विभाग की भूमिका पर चर्चा

क्षेत्र में जहरीली महुआ शराब से हो रही मौतों के बावजूद अब तक ठोस और निर्णायक कार्रवाई न होने पर अबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध महुआ शराब के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाते, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

सरपंच का दावा

सरपंच अरविंद कुजूर ने मीडिया को मौखिक रूप से जानकारी देते हुए दावा किया है कि पिछले दो से तीन वर्षों में महुआ शराब के सेवन से एक दर्जन से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

जनस्वास्थ्य बनाम अवैध नशा कारोबार

सन्ना की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह विवाद महुआ शराब बनाम अंग्रेजी शराब का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और अवैध नशा कारोबार के बीच का है। यदि समय रहते प्रभावी निर्णय और कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके परिणाम और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

वहीं स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे शराब दुकान को पूरी तरह बंद करने की नहीं, बल्कि वर्तमान स्थान से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग कर रही हैं।