महाशिवरात्रि मेला या जमीन का खेल? कैलाश गुफा को लेकर उठा सवाल , विभिन्न पंचायतों ने की प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
जशपुर बगीचा: महाशिवरात्रि से ठीक पहले जिले के आस्था केंद्र कैलाश गुफा से जुड़ा मेला इस बार धार्मिक उत्सव से ज्यादा प्रशासनिक चुनौती बनता नजर आ रहा है। मेला आयोजन के स्थान को लेकर उपजा विवाद अब गांवों से निकलकर कलेक्टोरेट तक पहुंच गया है।
क्षेत्र की ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों का कहना है कि कैलाश गुफा में लगने वाला पारंपरिक मेला वर्षों से एक तय व्यवस्था के तहत आयोजित होता आ रहा है। यह मेला हर साल मंदिर के पश्चिम दिशा में स्थित ठाकुर घर के नीचे मौजूद शासकीय खुले मैदान में लगता रहा है, जहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थायी चबूतरे भी निर्मित हैं।
लेकिन आरोप है कि बीते कुछ वर्षों से मेला स्थल को बार-बार बदला जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार कैलाश गुफा समिति से जुड़े कुछ लोग मेले को झिमना पाठ क्षेत्र की वन विभागीय नर्सरी की ओर ले जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह बदलाव किसी अस्थायी जरूरत के बजाय जमीन पर कब्जे की मंशा से किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि नर्सरी क्षेत्र में मेला लगने से वन विभाग की भूमि प्रभावित हो रही है, पौधारोपण नष्ट हो रहा है और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि हर वर्ष मेला स्थल बदलकर धीरे-धीरे जमीन पर अधिकार जमाने की कोशिश की जा रही है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ग्राम पंचायत सारुढाब, सोनगेरसा और गायबुड़ा की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीनों पंचायतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया कि मेला केवल पारंपरिक शासकीय स्थल पर ही लगाया जाना चाहिए और आयोजन का संचालन ग्राम पंचायतों की निगरानी में हो।
ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि 14 से 16 फरवरी 2026 तक प्रस्तावित महाशिवरात्रि मेले की अनुमति पुराने निर्धारित स्थल पर ही दी जाए। साथ ही वन विभाग की भूमि पर मेला लगाने या कब्जे का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में कलेक्टर जशपुर को ज्ञापन सौंपा गया है, जिसकी प्रतिलिपि एसडीएम बगीचा, तहसीलदार सन्ना, जनपद पंचायत बगीचा के सीईओ और चौकी प्रभारी पंडरापाठ को भी भेजी गई है। कई जनप्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर कर शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम बगीचा प्रदीप राठिया ने बताया कि मेला स्थल से जुड़े विवाद और कैलाश गुफा मंदिर का ताला खुलवाने के प्रकरण को लेकर दोनों पक्षों को बैठक के लिए बुलाया गया है। प्रशासन सभी तथ्यों को सुनने के बाद नियमानुसार निर्णय लेगा।