जशपुर: महाशिवरात्रि पर कैलाश नाथेश्वर गुफा में हजारों बच्चों का उपनयन संस्कार संपन्न

जशपुर: महाशिवरात्रि पर कैलाश नाथेश्वर गुफा में हजारों बच्चों का उपनयन संस्कार संपन्न

जशपुर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवालय कैलाश नाथेश्वर गुफा में इस वर्ष भी बड़ी संख्या में धार्मिक संस्कार संपन्न हुए। अलकनंदा जलप्रपात के समीप आयोजित इस भव्य संस्कार कार्यक्रम में सैकड़ों बच्चों ने वैदिक परंपरा के अनुसार विभिन्न संस्कार ग्रहण किए।

कार्यक्रम के दौरान लगभग 600 बच्चों का मुंडन संस्कार, 500 बच्चों ने यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया, जबकि करीब 350 बच्चों का कर्णवेधन संस्कार संपन्न कराया गया।

महाशिवरात्रि के दिन यहां बिना किसी जाति या धर्मभेद के संस्कार कराए जाते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार मानव जीवन में कुल 24 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें उपनयन संस्कार का विशेष महत्व है। इसी संस्कार में जनेऊ धारण कराया जाता है।

आचार्यों के अनुसार उपनयन का अर्थ है — ब्रह्म (ईश्वर) और ज्ञान के समीप ले जाना। इस अवसर पर उपस्थित आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति के लिए नियमों का पालन अनिवार्य होता है। एक बार जनेऊ धारण करने के बाद उसे उतारा नहीं जाता, और यदि वह अशुद्ध हो जाए तो विधि-विधान से नया जनेऊ धारण करना आवश्यक होता है।

सभी संस्कार संत गहिरा गुरु संस्कृत महाविद्यालय के आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराए गए। जशपुर, सरगुजा और रायगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। उरांव, अहीर, नगेशिया सहित कई समुदायों के लोगों ने भी सहभागिता निभाई।

महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं ने गुफा के भीतर स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। सुबह 4 बजे से ही लंबी कतारें लग गई थीं, जो देर शाम तक जारी रहीं। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जवानों के साथ महाविद्यालय के छात्र भी तैनात रहे।

उपनयन संस्कार कराने वाले आचार्यों ने उपस्थित लोगों को इस संस्कार के महत्व और इसके नियमों का पालन करने का संकल्प भी दिलाया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा के संरक्षण का भी संदेश देता नजर आया।