जशपुर: साल 2018 में स्ट्रॉबेरी का हुआ था पहला प्रयोग , आज रकबा पहुंचा 100 एकड़
जशपुर जिले की जलवायु स्ट्रॉबेरी के उत्पादन के लिए अनुकूल है और हर साल इसका उत्पादन बढ़ रहा है।
इस साल बीते साल की तुलना में दोगुने से अधिक भू-भाग पर स्ट्रॉबेरी की फसल लगाई गई थी। दिसंबर माह में पड़े ओले का ज्यादा असर स्ट्रॉबेरी पर नहीं पड़ा और इस साल भी इसका बेहतर उत्पादन हुआ है।
वर्तमान में स्ट्रॉबेरी के फल तैयार हो चुके हैं। किसान इसे खेतों से तोड़कर बाजार में बेच रहे हैं। पैकेट में बंद कर स्ट्रॉबेरी लोकल बाजार में उतार दिया गया है। इसके साथ ही डिमांड के अनुरूप यहां से फल रायपुर और बिलासपुर भी भेजे जा रहे हैं। बीते साल की तुलना में इस साल अधिक संख्या में किसानों ने स्ट्रॉबेरी का उत्पादन शुरू किया है। ग्राम लरंगा, बंधुटोली और कोपा जैसे गांव में कई किसान पहली बार स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं। बीते साल 33 किसानों ने 42 एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाया था। वहीं इस साल 60 से अधिक किसानों ने इस फसल का उत्पादन किया है।
स्ट्रॉबेरी के उत्पादन को बढ़ाने की शुरूआत साल 2023 में हुई थी। 22 सितंबर 2023 को 6 गांव के 25 किसानों को पौधों का वितरण किया गया था। नाबार्ड के
एफएसपीएफ योजना के तहत रीड्स संस्था द्वारा बगीचा विकासखंड के ग्राम सन्ना, अकरीकाना, लोरो, कोपा, लरंगा और मैना गांव का चयन स्ट्रॉबेरी की खेती करवाई थी। सभी गांव को मिलाकर 25 किसानों ने बाड़ी तैयार कर प्रत्येक किसान ने दो-दो हजार पौधे लगाए गए थे।
साल 2023 में उत्पादन भी बेहतर हुआ था और उच्च क्वालिटी के स्ट्रॉबेरी निकले थे। इसे देखते हुए साल 2024 में उद्यान विभाग द्वारा किसानों को स्ट्रॉबेरी के उत्पादन से जोड़ा गया और किसानों को विभाग द्वारा सहयोग भी दिया गया है। किसान रीड्स संस्था की देखरेख में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। इस साल 60 से अधिक किसानों ने इस फसल का उत्पादन किया है। रीड्स के गोवर्धन होता ने बताया कि जितनी अधिक ठंड पड़ेगी, स्ट्रॉबेरी की क्वालिटी उतरी बेहतर होगी। वैसे इसका उत्पाद 25 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर ही होता है। जशपुर के पहाड़ी इलाकों में हर साल नवंबर से लेकर जनवरी तक तापमान 25 डिग्री से कम ही होता है। दिसंबर और जनवरी में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री के भी नीचे होता है। इस साल दिसंबर माह में अधिकांश दिन तापमान 5 डिग्री या उससे कम रहा। इसलिए और अच्छी क्वालिटी के फल आए हैं।
वर्ष 2018 में हुआ था 2 एकड़ में पहला प्रयोग
सबसे पहले वर्ष 2018 में बगीचा विकासखंड के ग्राम सन्ना में प्रयोग के तौर पर 2 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती प्रयोग के तौर पर हुई थी। दूसरी बार प्रयोग के तौर पर 5 गांव में स्ट्रॉबेरी लगवाई गई। अनुकूल जलवायु होने की वजह से उत्पादन पहले के सालों में बेहतर हुआ था। इस बार फसल के बाद यह पता चल जाएगा कि इस बार किस क्वालिटी के स्ट्रॉबेरी निकल रहे हैं। क्योंकि अन्य सालों की तुलना में इस साल तापमान में काफी ज्यादा अंतर है।